निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाने के बजाय तथ्यों का सम्मान करे विपक्ष : मनोज राय
लेखक सतीश कुमार पाण्डेय
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निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाने के बजाय तथ्यों का सम्मान करे विपक्ष : मनोज राय
जिला संवाददाता एक संदेश मऊ
मऊ।
जिला पंचायत अध्यक्ष मनोज राय ने पत्रकार वार्ता में निर्वाचन प्रक्रिया, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) तथा निर्वाचन आयोग को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचन आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा राजनीतिक दलों को किसी भी विषय पर अपनी बात तथ्यों और संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप रखनी चाहिए।
मनोज राय ने कहा कि विपक्ष द्वारा निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को जारी अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि SIR से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची को अधिक व्यवस्थित और विश्वसनीय बनाने के लिए प्रक्रिया के अंतर्गत आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 24 जून 2025 के SIR आदेश को लेकर भी विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा सवाल उठाए गए थे, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2026 के अपने निर्णय में बिहार में किए गए SIR की वैधानिकता को बरकरार रखा। न्यायालय ने माना कि निर्वाचन आयोग को संबंधित कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का अधिकार है और प्रक्रिया में निर्धारित सुरक्षा उपाय भी मौजूद हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि नए मतदाताओं के पंजीकरण तथा मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए Form-6 की व्यवस्था निर्वाचन प्रक्रिया का हिस्सा है। निर्वाचन आयोग की मतदाता सेवा व्यवस्था के माध्यम से पात्र नागरिकों को मतदाता पंजीकरण सहित विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
मनोज राय ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों को निर्वाचन आयोग की आलोचना करने का अधिकार है, लेकिन आलोचना तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम अथवा निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर असहमति होने पर संवैधानिक और कानूनी माध्यम उपलब्ध हैं और राजनीतिक बहस को इन्हीं लोकतांत्रिक संस्थाओं के माध्यम से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों का भी उल्लेख किया जिनमें निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता, EVM तथा अन्य संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। मनोज राय के अनुसार, ऐसे आरोपों से जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, इसलिए सभी राजनीतिक दलों को सार्वजनिक चर्चा में प्रमाणित तथ्यों और आधिकारिक दस्तावेजों को आधार बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत का निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जो लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों के संचालन से संबंधित जिम्मेदारियां निभाता है। लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनाव कराने से नहीं, बल्कि नागरिकों के निर्वाचन प्रक्रिया में विश्वास से भी जुड़ी है। इसलिए राजनीतिक दलों, जनप्रतिनिधियों और नागरिक समाज की जिम्मेदारी है कि वे चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विषयों पर जनता के सामने प्रमाणित जानकारी रखें और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति संवाद एवं विश्वास का वातावरण बनाए रखें। राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़े विषयों पर सार्वजनिक विमर्श तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होना चाहिए। इस दौरान जिलाध्यक्ष रामाश्रय मौर्य, मीडिया प्रभारी प्रीतुलता पांडेय, जिला उपाध्यक्ष कृष्णकांत राय, शर्वेश राय उपस्थित रहें।
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